नई दिल्ली। कोरोना वायरस से मुकाबले में सरकार को आर्थिक रूप से मजबूत करने वालों में केवल भारतीय ही नहीं बल्कि विदेशी भी शामिल हैं। रूस सरकार की मुख्य रक्षा निर्यात संस्था रोसोबोरोनएक्सपोर्ट ने कोविड-19 संकट से निपटने के लिए गठित पीएम केयर्स फंड में 2 मिलियन डॉलर की राशि दान की है। रसियन कंपनी की इस पहल का स्वागत करते हुए देश के जाने माने राजनीतिक रणनीतिकार, पॉलिसी मेकर व अखिल भारतीय प्रधान संगठन के राष्ट्रीय संयोजक कृष्ण झा ने कहा कि भारत परंपरागत रूप से रोसोबोरोनएक्सपोर्ट का प्रमुख साझेदार रहा है। अब इस मुश्किल घड़ी में कंपनी मानवीय उद्देश्य के लिए उसकी मदद कर रही है। कोरोना से लड़ाई के लिए कंपनी की तरफ से भारत को 2 मिलियन डॉलर की राशि दान स्वरूप दी गई है। यह इस महामारी से मुकाबले में हमारी एकजुटता को प्रदर्शित करता है।
झा ने कंपनी के सीईओ एलेक्जेंडर मिखिव व विक्टर कोमार्डिन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि रोसोबोरोनएक्सपोर्ट की तरफ से पीएम केयर्स फंड में यह दान चिकित्सा उपकरणों की व्यवस्था करने के उद्देश्य से दिया गया है। मास्को स्थित भारतीय दूतावास ने पीएम केयर्स फंड का व्यापक पैमाने पर प्रचार किया था, ताकि कोरोना से लड़ाई में आर्थिक पक्ष को और भी मजबूत किया जा सके। इसी के मद्देनजर रोसोबोरोनएक्सपोर्ट ने भारत को 2 मिलियन डॉलर की राशि दान की है। देशवासी भी इस मुश्किल घड़ी में मोदी सरकार का पूरा साथ दे रहे हैं। ‘आम’ से लेकर ‘खास’तक अपनी हैसियत के हिसाब से पीएम केयर्स फंड में योगदान दे रहे हैं।
झा ने पत्रकारों को बताया कि कोरोना से जंग में पीएम केयर्स फंड में योगदान देने वाली रोसोबोरोनएक्सपोर्ट पहली विदेशी कंपनी है। भारत सरकार ने पहले ही घोषणा की थी कि पीएम केयर्स फंड एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट होने के नाते भारत और विदेश से “महामारी की अभूतपूर्व प्रकृति को ध्यान में रखते हुए”योगदान स्वीकार करेगा। उन्होंने कहा कि रोसोबोरोनएक्सपोर्ट और भारत के बीच आखिरी बड़ा सौदा अक्टूबर 2018 में S400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली के लिए हुआ था।
गौरतलब है कि रोसोबोरोनेक्सपोर्ट रूसी सरकार का हिस्सा है और भारत को दान देने की उसकी घोषणा दोनों देशों के बीच घनिष्ठ होते संबंधों को दर्शाते हैं। पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन ने कोरोना संकट पर बात की थी। इसके बाद विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला और रूसी उप विदेश मंत्री इगोर मोर्गुलोव के बीच भी बातचीत हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने अपने-अपने देशों में फंसे हुए एक-दूसरे के नागरिकों का कल्याण सुनिश्चित करने में घनिष्ठ द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की थी। रूस में लगभग 15,000 भारतीय छात्र हैं और करीब 5000 रूसी पर्यटक इस वक्त भारत में हैं।
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