दिल्ली । पार्टी विरोधी गतिविधि, देश विरोधी कार्य और विरोधी राजनीतिक दलों का प्रचार करने पर याचिका दायर । इसी आधार पर कपिल मिश्रा के खिलाफ याचिका स्वीकार कर चुके हैं विधानसभा अध्यक्ष। 85 पेज की याचिका में केजरीवाल की पार्टी विरोधी गतिविधियों, देश विरोधी बयानों को मुख्य आधार बनाया गया हैं । याचिका की खास बात ये हैं कि याचिका में बिल्कुल

ठीक उसी तरह के तर्कों और सबूतों को आधार बनाया गया हैं जिनके आधार पर विधानसभा अध्यक्ष ने कपिल मिश्रा के खिलाफ याचिका स्वीकार की थी।
कपिल मिश्रा ने अपनी याचिका में लिखा हैं कैसे केजरीवाल ने लोकसभा चुनावों के दौरान विरोधी राजनैतिक दलों के साथ मंच साझा किया। कपिल मिश्रा ने ये भी लिखा हैं कैसे केजरीवाल ने विरोधी राजनैतिक दलों के पक्ष में चुनाव प्रचार किया। इसमे कपिल मिश्रा ने ममता बनर्जी और चंद्रबाबू नायडू का उदाहरण दिया हैं।
उल्लेखनीय हैं कि कपिल मिश्रा पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने भाजपा के नेताओं के साथ मंच साझा किया व प्रधानमंत्री मोदी के पक्ष में प्रचार किया। कपिल मिश्रा ने अपनी याचिका ने अन्ना हज़ारे, कुमार विश्वास, मयंक गांधी, प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव के बयानों का हवाला देते हुए केजरीवाल को पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए दोषी माना हैं।
कपिल मिश्रा ने याचिका में केजरीवाल को देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का भी आरोप लगाया हैं । उन्होंने केजरीवाल के सर्जिकल स्ट्राइक में दिए बयानों, सेना के खिलजी दिये बयानों का उल्लेख करते हुए केजरीवाल को पार्टी संविधान के खिलाफ कार्य करने वाला बताया हैं।
कपिल मिश्रा ने ये भी बताया हैं कि किस प्रकार केजरीवाल केवल मोदी के विरोध में अंधे हो गए हैं व अपना मानसिक संतुलन खोने लगे हैं। उन्होंने केजरीवाल के उस बयान का उदाहरण दिया हैं जब केजरीवाल ने कहा था कि मोदी जी उनकी हत्या करवाना चाहते हैं। कुल मिलाकर कपिल मिश्रा की ये याचिका विधानसभा अध्यक्ष व केजरीवाल के लिए जंजाल साबित होगी। क्योंकि जिस आधार पर कपिल मिश्रा के खिलाफ याचिका स्वीकार हुई हैं उसी आधार पर इस याचिका की सुनवाई करना अब विधानसभा अध्यक्ष की मजबूरी हैं। ऐसे में कपिल मिश्रा की याचिका को अगर नजरअंदाज किया गया या अस्वीकार किया गया तो जो याचिका कपिल मिश्रा के खिलाफ लगी हैं उसका भी वही हश्र होगा।
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