
को सम्बोधित करते हुए कहा कि कृषि के प्रति वांक्षित आकर्षक पैदा करने एवं उसको कम खर्चीला व अधिक लाभकारी बनाने के लिए जिन महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार किया जा रहा है उसमें प्रमाणित एवं उपचारित बीजों की उपलब्धि, उर्वरकों का संतुलित उपयोग, अच्छा जल प्रबंधन एवं एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन मुख्य है। उन्होंने कहा कि दो या दो से अधिक फसलों के साथ बागवानी, पशुपालन, मत्सय पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन करके किसान कम लागत, स्वच्छ पर्यावरण में दूनी आय प्राप्त कर अपनी समृद्धि करके कृषि का सतत विकास कर सकते है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान श्यामरथी यादव तथा संचालन सहायक विकास अधिकारी कृषि सुरेंद्र कुमार राय ने किया।
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