बहराइच । पर्यावरणीय संतुलन बनाये रखने के लिए यह आवश्यक है कि प्रदेश का अधिक से अधिक भू-भाग हरा भरा हो। वनों एवं वृक्षों से निरन्तर लाभ प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि राष्ट्रीय वन नीति 1988 एवं राज्य वन नीति 2017 के अनुसार प्रदेश का एक तिहाई भू-भाग वनाच्छादित व वृक्षाच्छादित हो। भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट 2017 के अनुसार उ.प्र. के कुल भागौलिक क्षेत्रफल का मात्र 6.09 प्रतिशत वनावरण तथा 3.09 प्रतिशत वृक्षावरण कुल भागौलिक क्षेत्र का 918 प्रतिशत मात्र क्षेत्र (22121 वर्ग किमी. भूभाग) में ही वनावरण एव वृक्षाच्छादन है। उक्त आकड़ा मानक एक

तिहाई से बहुत कम है। वन नीति के एक तिहाई आॅकड़े को प्राप्त करने हेतु यह आवश्यक है कि अधिक से अधिक भूमि पर वृक्षारोपण कराया जाय।
वर्तमान समय में कोविड-19 के कारण उत्पन्न विषम परिस्थितियों में प्रभावी लाॅकडाउन के कारण विभिन्न शहरों एवं प्रदेशों से लौटे प्रवासी कामगारों को रोज़गार उपलब्ध कराये जाने के उद्देश्य से जनपद की सभी 1054 ग्राम पंचायतों में महात्मा गाॅधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारण्टी अधिनियम (मनरेगा) अन्तर्गत 5801 कार्य प्रारम्भ कराकर 01 लाख से अधिक गैर दक्ष श्रमिकों को रोज़गार प्रदान किया जा रहा है। मनरेगा अन्तर्गत जनपद में संचालित अगर ट्रेडवार कार्यों की चर्चा की जाये तो सूखारोधन अन्तर्गत पौध रोपण हेतु जनपद के समस्त विकास खण्डों में 22 लाख 60 हज़ार 20 गढ्ढों की खुदाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसके सापेक्ष अब तक 09 लाख 02 हज़ार 136 गढ्ढों की खुदाई की जा चुकी है।
विकास खण्डवार निर्धारित लक्ष्य व उसके सापेक्ष हुए कार्यों को देखा जाय तो बलहा में लक्ष्य 132930 के सापेक्ष 46345, चित्तौरा में 187180 के सापेक्ष 109735, हुज़ूरपुर में 166180 के सापेक्ष 136056, जरवल में 166180 के सापेक्ष 65800, कैसरगंज में 153930 के सापेक्ष 27600, महसी में 150180 के सापेक्ष 58600, मिहींपुरवा में 180180 के सापेक्ष 76200, नवाबगंज में 152180 के सापेक्ष 57000, फखरपुर में 180180 के सापेक्ष 36200, पयागपुर में 155680 के सापेक्ष 44400, रिसिया में 159180 के सापेक्ष 80340, शिवपुर में 148680 के सापेक्ष 79600, तजवापुर में 157430 के सापेक्ष 72200. एवं विशेश्वरगंज में 160930 के सापेक्ष 12060 गढ्ढों की खुदाई की जा चुकी है। ताकि वर्ष 2020-21 अन्तर्गत वर्षा ऋतु में वृक्षारोपण के लिए समय पूर्व ही रोपित किये जाने वाले पौध के लिए गढ्ढे उपलब्ध रहे।
आज वृक्षारोपण जैसे कार्य को प्रत्येक स्तर पर प्रोत्साहित किया जाना आवश्यक ही नहीं बल्कि मज़बूरी है। क्यांेकि वृक्षविहीन धरती पर मानव जीवन का अस्तित्व बच पाना न मुमकिन है। विभिन्न प्रकार की पर्यावर्णीय समस्याओं सेे निजात पाने का सबसे सुगम और आसान रास्ता है कि उपलब्ध भूमि पर अधिक से अधिक पौधे रोपित किये जायें और जहाॅ तक संभव हो उनकी सुरक्षा भी की जाये। क्योंकि पर्यावरण प्रदूषण एक ग्लोबल समस्या बन चुकी है। प्राकृतिक वन सम्पदा और हरे भरे बाग-बगीचे ही इस समस्या से निजात दिला सकते हैं।
सब की नजर | हर अपराध पर हमारी नजर #1 Hindi News Portal