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राजेन्द्र प्रसाद का जीवन अनुकरणीयः राकेश श्रीवास्तव

जौनपुर। देश के प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद की 135वीं जयंती पर नगर के एक होटल में अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के नेतृत्व में एकत्रित होकर स्वजातीय बंधुओं ने भगवान चित्रगुप्त व बाबू राजेन्द्र प्रसाद के चित्र पर माल्यार्पण कर उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। तत्पश्चात् आयोजित संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुये प्रदेश महामंत्री/जिलाध्यक्ष राकेश श्रीवास्तव ने महासभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश पर 3 दिसम्बर को राष्ट्रीय मेधा दिवस के रूप में प्रतिवर्ष मनाया जायेगा। बाबू राजेन्द्र प्रसाद बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। भारत छोड़ो आंदोलन व असहयोग आंदोलन में सक्रियता के चलते उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। स्वाधीनता की लड़ाई में जी जान से लगे बाबू जी ने स्वतंत्रता में जब देश का संविधान लिखा गया तो वह संविधान सभा के अध्यक्ष बने। इसी क्रम में युवा जिलाध्यक्ष संजय अस्थाना ने बताया कि राष्ट्र रत्न राजेन्द्र प्रसाद बहुत विलक्षण बुद्धि के स्वामी थे। वह मात्र 18 वर्ष की आयु में कोलकाता विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा सर्वोच्च अंक से पास किया। उन्हें कोलकाता में प्रसिद्ध प्रेसीडेंसी कालेज में दाखिला लेकर लॉ के क्षेत्र में डाक्टरेट की उपाधि हासिल की। बाद में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से प्रेरित होकर वह स्वाधीनता आंदोलन में कद पड़े। हमें उनके जीवन से प्रेरणा प्राप्त करनी चाहिये। प्रदेश मंत्री रवि श्रीवास्तव, आनन्द मोहन श्रीवास्तव, रोशन श्रीवास्तव, प्रदीप श्रीवास्तव आदि स्वजातीय बंधुओं ने डा. राजेन्द्र प्रसाद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर जय आनन्द, सुधीर अस्थाना, प्रमोद दाद, एससी लाल, श्याम रतन, राकेश श्रीवास्तव पूर्व असलहा बाबू, राजन श्रीवास्तव, विजय श्रीवास्तव, अमित निगम, मनीष श्रीवास्तव, डा. रंजीत श्रीवास्तव, अनूप श्रीवास्तव, सरोज श्रीवास्तव आदि स्वजातीय बंधु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन महासचिव सुरेश अस्थाना ने किया।

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