लखनऊ । लोकसभा चुनाव 2019 के सात चरणों में हुए चुनाव के वोटों की आज गिनती हो रही है और शाम तक यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि केन्द्र में सरकार बनने की यूपी की क्या भूमिका है। केंद्र में सरकार बनाने के नजरिए से उत्तर-प्रदेश की बड़ी सियासी भूमिका होती है। कारण है कि यूपी में लोकसभा की 80 सीटें हैं और इस राज्य की जीत के दम पर कई बार केंद्र में सरकारें बनी हैं। इस बार भी राजनीतिक दलों के साथ-साथ पूरे देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यूपी में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलती हैं और यूपी इस बार केंद्र की सियासत में कितनी बड़ी भूमिका निभा पाता है। मगर अब तक के जो रुझान मिले हैं, उसके मुताबिक बीजेपी का एक बार फिर से सूबे में दबदबा कायम है । यूपी में महागठबंधन का खासा असर नहीं दिखा है। इस लोकसभा चुनाव में यूपी में त्रिकोणीय मुकाबला रहा। यूपी की सियासत में इस लोकसभा चुनाव में वह देखने को मिला जो कई दशक पहले देखने को मिला था। यानी बीजेपी को टक्कर देने और ज्यादा से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल कर केंद्र में अहम भूमिका निभाने के उद्देश्य से मायावती की बसपा और अखिलेश यादव की सपा एक साथ चुनावी मैदान में आई। वहीं कांग्रेस इस चुनाव में अकेली दिखी। यूपी की 80 सीटों पर सिलसिलेवार तरीके से पूरे सात चरणों में मतदान हुए, जिनके नतीजे धीरे-धीरे जारी हो रहे हैं। यूपी में कई ऐसे वीवीआईपी सीटें हैं, मसलन वाराणसी, अमेठी, रायबरेली, गोरखपुर, मैनपुरी, कन्नौज, लखनऊ आदि जहां के नतीजों पर पूरे देश की नजर है। यूपी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई केंद्रीय मंत्रियों की किस्मत दांव पर है। साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, डिंपल यादव, मुलायम सिंह समेत कई दिग्गजों के भाग्य का आज फैसला होना है।
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